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बोर्ड की परीक्षा के अब कुछ ही दिन बाकि रह गए है – छात्र  तनावमुक्त कैसे रहे?

छात्र  ज्यादा तनावग्रस्त क्यों हैं?

जैसाकी हम सब जानते है की 10वीं और 12वीं की परीक्षा के अब कुछ ही दिन बाकि रह गए है, और ऐसे में जिन माता पिता के बच्चे यह बोर्ड की परीक्षा देने वाले है, उनके लिए ये तनावग्रस्त  स्थिति हो सकती है, परन्तु हम इस तनावग्रस्त परिस्थिति को कैसे मात दे सकते है? और यह जरुरी भी है|

भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में भी छात्रों में बढ़ता हुआ तनाव एक बड़ी समस्या है। वास्तव में इसी वजह से भारत में 15 से 29 की उम्र के लोगों के बीच आत्महत्याओं की उच्चतम दर है। हालांकि कारण असंख्य हैं, लेकिन परीक्षा में विफलता, बेरोजगारी, और निराशा  कुछ कारण है जिसकी वजह से लोग अपने जीवन जोखिम में डाल रहे हैं ।

चिंता का एक आम कारण यह है कि कक्षा दसवीं और बारहवीं बोर्ड की परीक्षाओं में अच्छा करने के लिए माता-पिता से दबाव पड़ता है और उससे पहले भी ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं जहां परीक्षा के दौरान और परिणाम दिवस पर छात्रों ने आत्महत्या कर ली है। परन्तु क्या यह इतना चरम कारण है कि छात्रों को अपने जीवन का अंत तय कर लेते है?

मनोवैज्ञानिकों का सुझाव है कि छात्रों को चिंता और दर्दनाक परीक्षा के डर से संबंधित विकार से पीड़ित हैं। डर का मुख्य कारण यह है कि छात्र परीक्षा और परिणाम की चिंता, निराशा से पीड़ित है। और यह डर सिरह स्कूल से ही आता है ऐसा नहीं है, लेकिन माता पिता भी अपने बच्चो को ऊपरी स्तर पर जाने के लिए और बेहतर ग्रेड प्राप्त करने के लिए दबाव डालते है|

जबकि जीवन का सबसे अच्छा समय छात्र जीवन का आनंद लेना है लेकिन बच्चो को ऊपरी स्तर पर जाने के लिए और बेहतर ग्रेड प्राप्त करने के लिए दबाव डाला जाता है|

आइए हम अपनी संस्कृति में मुख्य समस्याओं पर नजर डालते हैं:

भारतीय शिक्षा प्रणाली: समय  समय पर भारतीय शिक्षा प्रणाली के खिलाफ कई शिकायतें की गई हैं क्योंकि भारतीय शिक्षा प्रणाली में स्मरण की ओर और लंबे समय तक व्यवस्थित अध्ययन के लिए घंटे लगते हैं और मनोरंजक गतिविधियों के लिए कम समय मिलता है, और समाजीकरण जो एक बच्चे के विकास का एक अनिवार्य हिस्सा है, उससे कही दूर रह जाते है।

छात्र की 12 वीं कक्षा का परिणाम, कॉलेज या विश्वविद्यालय के विकल्प को निर्धारित करता है| साइंस स्ट्रीम छात्र विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में प्रवेश के लिए अलग से प्रवेश परीक्षा देने के कारण ज्यादा तनाव में चला जाता है, और यह गलाकाट प्रतिस्पर्धा है|

माता पिता और स्कूल से दबाव: पढ़ाई में अच्छी तरह से सफलता प्राप्त करने के डर से छात्रों के बीच चिंता पैदा कर रहा है और इस वजह से उनके अकादमिक और सामाजिक सफलता पर काफी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। छात्र के मूल्य को उसकी अकादमिक सफलता और ग्रेड द्वारा निर्धारित किया जाता है नाकि व्यक्तिगत गुण से| माता पिता सिर्फ केबल कनेक्शन, इंटरनेट, कंप्यूटर से छुटकारा पाने के लिए प्रयास करें, ताकि उनके बच्चों का ध्यान पढाई में केंद्रित रहे और बेहतर ग्रेड मिले।

हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण में दो-तिहाई छात्रों ने बताया कि उनके माता-पिता उन्हें बेहतर अकादमिक प्रदर्शन के लिए उनपर दबाव डालते और यह, स्नातक और पोस्ट ग्रेजुएट अभिभावकोंकी तुलना से गैर स्नातक माता-पिता का दबाव अधिक था|

आंकड़ों के हिसाब से हर रोज, लगभग 6 छात्र ऐसे दबाव के कारण आत्महत्या कर लेते है, और हमें समज़ने की कोशिश करनी चाहिए की कहा कुछ गलत हो रहा है?

बेहतर ग्रेड पर जोर इतना है कि छात्रों को सीखने में ज्ञान के साथ गम्मत वाला तत्व भूल जाते हैं। कुछ भी अगर अच्छी तरह से सिखाया जाय तो उसे और भी दिलचस्प बनाया जा सकता है। ऐसा नहीं है की सिर्फ छात्र का ही पढाई का प्रदर्शन ख़राब होता है, शिक्षकों का भी प्रदर्शन यानि अच्छे से पढ़ाने की पद्धति भी कमजोर होती है। लेकिन अफसोस की बात है की इसके लिए कोई मानदंड नहीं हैं। 50% से अधिक छात्र निजी ट्यूटर्स रखते है मतलब हम क्यों स्कूलों का ऐसे उच्च शिक्षण शुल्क का भुगतान कर रहे है अगर अंत में तो छात्रों को निजी ट्यूटर्स से अध्ययन करने जाना पड़ता हैं?

छात्रों को तनाव से छुटकारा कैसे दिलाये?

सबसे पहले ये जरुरी है की दूसरों के साथ अपने बच्चों की तुलना न करें| अध्ययन और आराम के बीच एक उचित संतुलन बनाए रखने में आपको अपने बच्चे को सुनिश्चित करना चाहिए  है। और देर रात तक अध्ययन सत्र से बचना चाहिए।

हरएक का पढाई का तरीका अलग अलग होता है| छात्रों को, कैसे लंबे समय तक प्रभावी ढंग से अध्ययन कर सके उसके लिए उन्हें अपनी खुद की योजना विकसित कर सकता है, और अपने सीखने के तरीकों का विकास के लिए माता पिता और शिक्षकों की मदद ले सकता है। बोर्ड परीक्षा के शुरू होने के साथ, हर माता पिता को पता होना चाहिए की यह सिर्फ एक परीक्षा है, दुनिया का अंत नहीं है।

आवेदन करने वाले छात्रों की उच्च संख्या कॉलेजों की सीमित सीटो से काफी ज्यादा है, और नामी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में प्राप्त करने के लिए  के साथ, यह शीर्ष कॉलेज में प्राप्त करने के लिए मुश्किल हो सकता है ।जो छात्र का ऐसे नामी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में दाखिला नहीं मिलता वह छात्र, ब्रिटेन, आयरलैंड, अमेरिका, कनाडा, या अन्य देशों में भी अध्ययन कर सकते है।

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