DigitalDahod

A Step Towards Digital India – Get all the Latest News from Dahod

मोबाईल नंबर, ईमेल और डाटा सेफ्टी

DATA-MINING

हम सभी के मोबाईल में कभी कभी कुछ ऐसे मैसेजिस आते है, जो की कोई कंपनी या प्रोडक्ट के बारे में होता है| इसी तरह आपके इनबॉक्समे भी कुछ ऐसे ही ईमेल मिलते होंगे| क्या आपने कभी सोचा है की आपका मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी इन कम्पनीओ के पास कैसे आया?

आपके मोबाईल नंबर और ईमेल जैसी इनफार्मेशन इन कम्पनिओको बेचीं जाती है| अभी कुछ दिनों पहले एक चर्चा बहुत गर्मायी हुई थी की नागरिकों के आधार कार्ड की इनफार्मेशन सुरक्षित  है या नहीं? वैसे ही कुछ कम्पनियाँ अपने मोबाईल नंबर या ईमेल की डिटेल्स बेचती है| यह डिटेल्स शहर, राज्य, या फिर उपभोक्ताओं की रूचि की अनुसार उसे बेचा जाता है|

हम में से ज्यादातर लोगों को क्रेडिट कार्ड, लोन, या फिर कुछ नै स्किम की बारे में कॉल एते है| जो हमारे लिए एक परेशानी बन चुकी है| इसी तरह से प्रोडक्ट्स और स्किम की बारे में हमें ईमेल भी मिलते है|

कुछ कम्पनियाँ ऐसे डाटा अपने या तो दूसरे राज्यों की मार्केटिंग कंपनियों को बेचती है| इसे “Data Mining” कहते है| इन कंपनियों की पास अलग अलग केटेगरी की हिसाब से डाटा उपलब्ध होते है, जैसी की – शेर बाजार में इन्वेस्ट करने वाले, क्रेडिट कार्ड रखने वाले, विद्यार्थी, या फिर उच्च पगार वाले कर्मचारी, वगैरह| इसी तरह से किसी खास राज्य या शहर में रहनेवाले या कोई एक कम्पनी की कर्मचारी, जैसी डाटा भी बेचा जाता है| इस डाटा की प्राइस इसकी केटेगरी की हिसाब से तय की जाती है| कंपनी इसे पेमेंट लेके ऑनलाइन या तो डिजिटल फॉर्मेट में उसके ग्राहकों तक पहुंचाती है| लोन देनेवाली कंपनी या क्रेडिट कार्ड देने वाली कम्पनियाँ ऐसे डाटा को अच्छीखासी कीमत देके खरीद लेते है|

अब सवाल यह है की इतनी सारे मोबाईल नंबर और ईमेल डाटा इन कमानियों की पास आया कहाँ से ?

जैसी की हम सब जानते है की कुछ जगह हमें हमारी डिटेल्स देना जरुरी होता है, जैसे की हम नया सिम खरीदने जाते है तो वहांभी हमें हमारा ID की रूपमे आधार या पैन कार्ड की कॉपी देनी पड़ती है| ठीक इसी तरह हम मोबाईल मेभी कोई एप्लिकेशन का उपयोग करते है तो वहाँभी लॉगिन करते वक्त मोबाईल और ईमेल देना पड़ता है|

इसी तरह से डाटा बेचने वाली कम्पनियाँ यह सारी डिटेल्स एकत्रित करती है| वैसे तो TRAI ने ऐसी डाटा माइनिंग न हो इसकी लिए कुछ नियम भी बनाये है, लेकिन फिर भी कुछ कम्पनियाँ किसी न किसी तरह से डाटा माइनिंग करती रहती है|

सौ बातों की एक बात : किसीभी जगह अपने डिटेल्स देते वक्त हमें ही ध्यान रखना होगा|