plastic ban in india

दाहोद जिले में प्लास्टिक की खपत पर प्रतिबंधित आदेश, प्लास्टिक उपयोग के आदेश का उल्लंघन करना दंडनीय अपराध होगा

दाहोद जिले में प्लास्टिक की खपत पर प्रतिबंधित आदेश

प्लास्टिक उपयोग के आदेश का उल्लंघन करना दंडनीय अपराध होगा

वर्तमान समय में विभिन्न प्रकार के रोजाना उपयोग की वास्तु, खाद्य पदार्थ वगैरह के लिए प्लास्टिक की थैलियोंका भरी मात्रा में इस्तेमाल होता हैं । इन प्रकार के बैग प्लास्टिक से बने होते हैं और इसका जैविक अपघटन होने में बहुत लम्बा समय लग जाता है और यह पर्यावरण के लिए भी नुकसानकारक है| प्लास्टिक बैग को बिजवाबदारी से कहीं भी फेकने से कचरा होता है, जिसकी वजह से स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों का निर्माण होता है। अगर बैग सीवेज , जल निकासी व्यवस्था , बारिश नाली , आदि , सीवर , नाली में एकत्रित होने से पानी के प्रवाह में बाधा में बाधा आती हैं, जिसके कारण महामारी फैलने का डर रहता है। यदि प्लास्टिक के थैले या उसके टुकड़े जानवरों के शरीर में चारा या अन्य पदार्थों के साथ जानवर के शरीर में प्रवेश करते हैं, तो पोषण का नुकसान भी होता है और कभी-कभी घातक परिणाम भी होते हैं । प्लास्टिक का मिट्टी मिलान होने से मिट्टी की उर्वरता और पानी की भंडारण की स्थिति कमजोर हो जाती है।

प्लास्टिक वेस्ट मैनेज अधिनियम, 2016

भारत सरकार के प्लास्टिक वेस्ट मैनेज अधिनियम, 2016 के अनुसार 50 माइक्रोन से कम मोटाई के साथ बनायी गयी प्लास्टिक बैग के उपयोग पर सरकार द्वारा प्रतिबंध लगा दिया है। गुजरात सरकार शहरों को स्वच्छ बनाने हेतु शहरों को जीरो वेस्ट सिटी बनाने हेतु महात्मा गांधी स्वच्छता मिशन के की शुरूआत की है। इस साल विश्व पर्यावरण दिवस का विषय, प्लास्टिक प्रदूषण , भारत सरकार के स्मार्ट सिटी मिशन के तीसरे चरण में दाहोद शहर को एक स्मार्ट शहर के रूप में विकसित करने के लिए चुना गया है । दाहोद शहर और पूरे जिले को साफ किया जाना चाहिए , प्रदूषण की रोकथाम और लोगों के स्वास्थ्य की रोकथाम बहुत महत्वपूर्ण है। पूरे जिले क्षेत्र में प्लास्टिक की थैलियों के उपयोग का हिस्सा है, को ध्यान में रखते बिक्री के सभी विवरण पर नियंत्रण लगाने के लिए दाहोद जिला मजिस्ट्रेट श्री विजय खराड़ी (आईएएस) ने आपराधिक प्रक्रिया अधिनियम , 1973 की धारा 144 के तहत निषेध आदेश लागू करने का आदेश दिया गया है।

तदनुसार 50 माइक्रोन से कम मोटाई वाली प्लास्टिक बैग्स और प्लास्टिकके चाय कप का उपयोग करने के लिए मना किया जा रहा और पूरे जिले की होटल, मुसाफिरखाना, सब्जी-फल की दुकाने, खुदरा और थोक बिक्री की दुकानें, संस्थाओं, सहकारी समितियों, बस स्टेशन – रेलवे स्टेशनों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर 50 माइक्रोन से कम मोटाई वाली बैग का उपयोग नहीं कर सकते|

 plastic pollution facts

भारतीय दंड संहिता की धारा 188

किसी भी वस्तु को भरने या ले जाने के लिए कोई प्लास्टिक बैग का उपयोग नहीं किया जा सकता है , जो किसी भी व्यक्ति की खाद्य वस्तु , गुटका , तम्बाकू, पान मसाला आदि संग्रह, पैकिंग और प्लास्टिक शीट के रूप में पैकेट, वगैरह का उपयोग नहीं कार शकेंगे| सार्वजनिक स्थानों जैसे की बाग़, बगीचे, पर्यटक स्थल जैसे झील, नहर, झीलों और जंगलों , वन्यजीव अभ्यारण्य आदि जैसे जल स्रोतमें प्लास्टिक बैग के साथ प्रवेश करने में सक्षम नहीं होंगे या कहीं भी नहीं फेंक सकते हैं। ग्रामीण इलाकों में, नगर पालिकाओं और ग्रामीण क्षेत्रों से संबंधित ग्रामीण पंचायत अपने क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरे को ठीक से का निपटारा करने की हिदायत है| और प्रान्त अधिकारियों, नगर पालिका चीफ अफसर, स्वास्थ्य विभाग और जिला विकास अधिकारी, यह उनके अधिकार क्षेत्र में इस आदेश प्रक्रिया के कार्यान्वयन को मजबूत करने के लिए किया जाएगा।

कोई भी व्यक्ति जो विक्रेता, कम से कम 50 माइक्रोन मोटाई प्लास्टिक की थैलियों या चाय संग्रह के कप का उपयोग करेगा तो यह दंड के पात्र होगा| आदेश का उल्लंघन करने वाले अपराधी को भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत दंडित किया जाएगा|

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