दाहोद जिला सांसदश्री जसवंतसिंह भाभोर के हस्तक्षेप से 37 साल बाद जलाशयों से प्रभावित लोगों को न्याय मिला: प्रभावित लोगों में खुशी का माहौल|

दाहोद जिला सांसदश्री जसवंतसिंह भाभोर के हस्तक्षेप से 37 साल बाद जलाशयों से प्रभावित लोगों को न्याय मिला: प्रभावित लोगों में खुशी का माहौल|

हदाफ अदुलवाड़ा कबूतरी बांध के 17 गांवों के 479 प्रभावित लोगों को 1058 हेक्टेयर जमीन का पूरा अधिकार मिला|

विश्व बैंक पुरस्कार विजेता केंद्रीय सिंचाई योजना के तहत, राज्य सरकार द्वारा दाहोद जिले के धानपुर  तालुका के अदलवाड़ा गांव के पास अदलवाड़ा, लिमखेड़ा तालुका के चुंदड़ी गांव के पास कबूतरी और पंचमहाल जिले के गोधरा तालुका के मातरिया (वेज्मा) गांव में हड़फ नदी पर जलाशय बनवाने हेतु 1978 में महूरत किया गया था।

यह जलाशयों के कार्य 1987-88 में पूरा हो गया था। इन जलाशयों के निर्माण की वजह से लिमखेड़ा तालुका के 5 गांवों के 84 प्रभावित लोगों, लिमखेड़ा तालुका के 5 गांवों के 124 प्रभावित लोगों और इस योजना में लिमखेड़ा तालुका के 7 गांवों के 27 गांवों के 471 लोग प्रभावित हुए थे। जिनको 1058-51-18 हेक्टेयर जमीन आवंटित की गई थी। गोधरा के 10 गांवों में शहरा और मोराव हड़फ तालुका, वावड़ी खुर्द, कालियावाव (आमली), बाही, खांदीआ (अंबालीया वाव), खटकपुर, सदनपुर (अंबात्रि), वांसडेलीया, वेज्मा और बलुखेदी जैसे 10 गांवों में वन विभाग की मंजूरी की उम्मीद में इन प्रभावित लोगों को पुनर्वास किया गया था। लेकिन पिछले 37 वर्षों से, वन प्रभावित भूमि इन प्रभावित लोगों के नाम पर नहीं हुई थी।

इसके बाद, उचित प्रस्ताव 2009 में केंद्र सरकार को भेजा गया था। पहले चरण की पहली संवैधानिक स्वीकृति शर्तों के अधीन थी। एनपीवी की राशि रु. 84.99 करोड़ केंद्र सरकार में जमा किया गया उसके बाद  जंगल विभाग को 1060 हेक्टेयर सरकारी भूमि में स्थानांतरित कर दिया गया। इस भूमि में जंगल के उद्देश्य के लिए, केंद्र सरकार में 37.41 करोड़ जमा किए गए थे। राजकोट, भावनगर और जामनगर जिलों से सरकारी भूमि खरीदी गई थी। गुजरात सरकार केंद्र सरकार में दूसरे चरण को अंतिम रूप देने का प्रस्ताव दिया गया था|

प्रभावित लोगों में ख़ुशी का माहौल

इसके लिए, दाहोद लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के सांसद जसवंतसिंह भाभोरने अपने अधिकारों से प्रभावित गरीब आदिवासी किसानों के अधिकार प्राप्त करने के लिए व्यक्तिगत रुचि ली। प्रधान मंत्री को संबंधित विभाग के संबंधित मंत्री से परामर्श में उचित प्रतिनिधित्व दिया गया। फल स्वरुप 25-4-2018 से 1058 हेक्टेयर भूमि, केंद्र ने सिंचाई विभाग को सौपी गयी और प्रभावित लोगों को उनकी जमीनों के सम्पूर्ण अधिकार प्राप्त हुआ| और प्रभावित लोगों में ख़ुशी का माहौल देखने मिला|

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