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भारत देश में स्वतंत्रता के बाद “आरक्षण” | Reservation System India

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भारत देश में स्वतंत्रता के बाद “आरक्षण” | Reservation System India

“आरक्षण” एक ऐसा शब्द जो हमें रोज अखबारों या टीवी पर पढ़ने या सुनने में आता है, ख़ास कर भारत देश में| हमारे देश में कहीं ऐसे लोग होंगे जिन्हे आरक्षण का सही मतलब ही नहीं मालूम होगा| सामान्यतः आरक्षण उनके लिए शुरू किया गया था जिनका सरकारी या सन्थानों में ज्यादा प्रभुत्व नहीं हो, यह लोग समाज के पिछड़े समुदाय या फिर अनुसूचित जनजाति या जाती से होते है या फिर सामाजिक या शिक्षा में पिछड़ेपन की वजह से जिनका विकास नहीं हो पाता| ऐसे लोगों को आगे लाने और उनके विकास हेतु हमारे देश में आरक्षण प्रक्रिया शुरू की गई|

अब हमारे मन में आरक्षण को ले कर कहीं सवाल आते है – जैसे की शिक्षा में आरक्षण देना उचित है या नहीं?, वर्तमान में आरक्षण निति को पूरी तरह समाप्त कर देना चाहिए या नहीं?, आदिवासियों की जनसँख्या के आधार पर आरक्षण मिलता है?, वगैरह वगैरह| आज आरक्षण का मुद्दा ऐसा हो गया है की इसके लिए लोग किसी भी अनैतिक और गैर जिम्मेदाराना आंदोलन पे उतर जाते है|

वैसे तो आरक्षण भारत में सबसे पहले १९८२ में यानि देश आझाद हुआ उसके भी पहले चालू किया गया, लेकिन उसके बाद १९०९ में फिर से आरक्षण अधिनियम प्रस्तुत किया गया,लेकिन फिर भी आरक्षण को स्वतंत्रता से पहले लागू नहीं किया गया|

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भारत देश में स्वतंत्रता के बाद डॉ.भीमराव आम्बेडकर ने आरक्षण की हिमायत की, जो उस समय के समाज के पिछड़े जाती के लोगों और गरीब लोगों के लिए जरुरी था| डॉ.आम्बेडकर ने यह भी सुझाया की यह आरक्षण प्रणाली को दस साल से ज्यादा लागू नहीं रखना चाहिए और इन्ही दस सालों में समाज के इन सभी पिछड़े और गरीब वर्ग को ऊपर लाना चाहिए| यानी आज़ादी के बाद आरक्षण को सिर्फ १० साल के लिए लागू किया गया, लेकिन समय समय पर सरकारों ने इस समय सिमा को लगातार बढ़ाते चले गए और आज ये हाल है की देश के काफी जातियों को आरक्षण के दायरे में शामिल किया गया है और जिन्हे नहीं किया गया उनमे से काफी लोग भी अब आरक्षण की मांग करने लगे है| और अब ये आलम है की लगभग समाज के काफी वर्ग इसकी मांग करने लगे है|

आरक्षण होना चाहिए या नहीं?

अब सोचने वाली बात है की क्या आरक्षण होना चाहिए या नहीं? अगर होना चाहिए तो आरक्षण की सही मायनों में जरुरत किसको है? आरक्षण जातीगत, लिंग आधारित, प्रबंधन, धर्म आधारित, शारीरिक रूप से विकलांग, सामाजिक या आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पे होना चाहिए या कोई अन्य मापदंड से होना चाहिए? हम भारत को महान क्यों कहते हैं, जब शिक्षा भारत में एक समान हो तो योग्यता में आरक्षण क्यों?

सो बात की एक बात

हमारे देश में कहीं ऐसे लोग है, जिन्हे सही मायनो में आरक्षण की जरुरत ही नहीं है, चाहे वह जाती के आधार पर हो या लिंग के आधार पर – लेकिन ज्यादातर लोग जो की अपनी आय के अनुसार जरुरत ना होने पर भी यदि किसी भी मापदंड में उन्हें आरक्षण मिल रहा है तो वह उसका लाभ उठाने से नहीं चूकते| जबकि ऐसे लोगों को स्वेच्छा से आरक्षण का लाभ नहीं लेना चाहिए ताकि इसका लाभ उन्हें मिल सके जिन्हे सही में इसकी जरुरत हो|

जिस दिन लोग ऐसी सोच रखना शुरू कर देंगे, उस दिन हमारा भारत सही मायने मे महान कहलायेगा|

जय भारत | जय हिन्द| मेरा भारत महान

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