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चलो आंदोलन करते है – देश की भलाई के लिए

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चलो आंदोलन करते है – देश की भलाई के लिए

आजकल हम रोज समाचार में देखते होंगे की किसानो का आंदोलन चल रहा है, शिक्षित बेरोजगार आंदोलन चल रहा है, किसी नेता या अभिनेता के कोई स्टेटमेंट के विरोध में आंदोलन चल रहा है| आजकल बैंक वालों का भी आंदोलन चल रहा है| जब देखो जहाँ देखो कोई न कोई आंदोलन चल रहा है| कही विद्यार्थी आंदोलन कर है है तो कहीं शिक्षक! इस देश की यह बड़ी अजीब विडम्बना है|

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आंदोलन का संक्षिप्त परिचय

आंदोलन मतलब एक प्रकार का सामूहिक संघर्ष – जो संगठित तंत्र या सत्ता या व्यवस्था द्वारा किया गया शोषण या अन्याय के खिलाफ एक सुनियोजित संघर्ष है| इसका उद्देश्य सत्ता तंत्र या व्यवस्था में बदलाव या सुधार करना होता है| जैसे की किसान आंदोलन – जोकि किसानो द्वारा किया गया आंदोलन, जिसका उद्देश्य किसानो की स्थिति में सुधार लाना, किसोनो की फसल का सही मूल्य मिलना, वगैरह था|

भारत देश की आझादी से पहले से लेकर अब तक कहीं आंदोलन चलाये गए| आझादी से पहले के कुछ प्रमुख आंदोलन इस प्रकार है – भारत छोडो आंदोलन १९४२, बारडोली सत्याग्रह १९२८, असहयोग आंदोलन १९२० से १९२२, बंग-भंग आंदोलन १९०५, चौरी-चौरा कांड १९२२, सायमन कमीशन नियुक्ति १९२७, और भी बहुत से आंदोलन | इसी प्रकार भारत देश आझाद होने के पश्च्यात भी कही आंदोलन हुए जैसे की – भारतीय गणतंत्र की स्थापना १९५०| आझादी के बाद हुए कुछ आंदोलनों ने तो देश की दिशा ही बदल दी, जैसे – चिपको आंदोलन : यह आंदोलन १९७० मे  भारत के जंगलों को बचाने के लिए किया गया था, जेपी आंदोलन : यह एक प्रभावशाली आंदोलन था, इस आंदोलन का मुख्या उद्देश्य १९७४ में बिहार सरकार के अंदर मौजूद भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू किया गया था|, जंगल बचाओ आंदोलन १९८०, नर्मदा बचाओ आंदोलन १९८५, जान लोकपाल बिल आंदोलन २०११, निर्भया आंदोलन २०१२|

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आंदोलन का उद्देश्य

वैसे तो गांधीजी ने भी अपने जीवनकाल में बहुत आंदोलन किये लेकिन वह सभी देश के लिए, भारत की आझादी के लिए थे, जैसी सत्याग्रह आंदोलन, चम्पारण आंदोलन, असहयोग आंदोलन, दलित आंदोलन और भारत छोडो आंदोलन|

आंदोलन का उद्देश्य अगर सही है तो ठीक है लेकिन आजकल तो अजीब अजीब प्रकार के आंदोलन हो रहे है| अगर हम भारत देश को विकास की छोटी पर लाना चाहते है और भारत को महासत्ता बनाना चाहते है और साथ ही अपने आने वाली पीढ़ियों को भी खुश देखना चाहते है तो हम सब को सही दिशा में आगे बढ़ना होगा, सच्ची और अच्छी सोच के साथ हम सब को मिल ज़ुल कर – चाहे वह आमिर हो या गरीबा, कोई भी जाती या धर्म का ही क्यों ना हो, सब को एक साथ और भारतीय बन कर आगे बढ़ाना होगा| तभी हमारा देश सुख, समृद्धि और दुनिया का सबसे बेहतरीन देश कहलायेगा|

अब अगर आप किसी आंदोलन शुरू करने वाले हो या किसी आंदोलन में जुड़ने वाले हो तो एक बार जरूर सोचियेगा की क्या यह आंदोलन सही मायने में देश के लिए और सभी लोगों के लिए वाकई में जरुरी है? क्या यह सभी की भलाई के लिए है? इससे देश का नुकसान तो नहीं होगा?

धन्यवाद!

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